चालाक मुर्गी और लोम्बी

technical bro
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एक समय की बात है ,एक मुर्गी खाने में एक लाल मुर्गी रहती थी!उसने अपना घर खुद बनाया था|वो बहुत ही मेहनती थी उसने दिन-रात मेहनत करके अपना खाना खुद ही जमा करती थी| उसके घर के पास एक तालाब था जिसमे एक चालाक लोम्बी अपनी बीवी के साथ रहता था |वह हमेशा ही अपनी बीवी को खुश करने के लिए अच्छा खाने का शिकार करता रहता था!लोम्बी और उसकी बीवी की नजर हमेशा उस लाल मुर्गी पर रहती थी|लोम्बी जब भी लाल मुर्गी को देखता तब सोचता की ये मुर्गी कितनी सवादिष्ट होगी! इसे मै अपनी बीवी को तोहफे में देना चाहता हु,और फिर हम इस लाल मुर्गी को बड़े बर्तन में पकाएंगे|एक दिन लोम्बी ने बाजार का थैला उठाया और अपनी बीवी से कहा की मै उस लाल मुर्गी को पकड़ने जा रहा हूँ तुम उसे पकाने की तैयारी करो फिर हम उसे बड़े मजे से खायेंगे|और ये कहकर लोम्बी लाल मुर्गी के घर के पास चला गया और उसकी बीवी बहुत खुश थी और उसने लाल मुर्गी को पकाने के लिए बड़ी कड़ाई निकाली!

उसमे पानी और मसाला डालकर उबलने को छोड़ दिया |उस समय रात को लाल मुर्गी अपने घर से खाना जमा करने बाहर निकली और खाना जमा करने लग गयी|उसने लोम्बी को पेड़ के पीछे छुपा हुवा नही देखा और खाना जमा करते -करते बहुत दूर चली गयी|लोम्बी ने सोचा यही अच्छा मोका है और वो जाकर लाल मुर्गी क घर में घुस गया|उसने पूरी तयारी कर राखी थी की वो लाल मुर्गी को कैसे पकड़ेगा!जैसे ही मुर्गी खाना जमा करके अपने घर लोटी और उसने घर में घुस कर जैसे ही दरवाज़ा बंद किया !लोम्बी ने देखा ये मोका अच्छा है इसके बाहर निकलने के सरे रस्ते बंद हो गये है उसने मुर्गी पर हमला कर दिया|मुर्गी भी उसके साथ बहादुरी से लड़ी उसने अपनी खाने की थैली को निचे छोड़कर उड़कर एक लकड़ी पर बैठ गयी और उसने साँस ली तथा लोम्बी से कहा| चालाक लोम्बी तू मेरे घर में क्या कर रहा है और तु कितनी भी कोसिस करले मुझे नही पकड़ पायेगा|

लोम्बी ने देखा की अभी इस मुर्गी को पकड़ना मुमकिन नही है ये होसियार और फुर्तीली भी है!पर लोम्बी भी चलाक था उसने मुर्गी से कहा की मै और मेरी बीवी आज तुम्हे रात को पकाकर खाने वाले थे ओर मै अपनी बीवी को निराश नही कर सकता|यह कहकर वह जहा मुर्गी बैठी थी! उसके निचे आकार गोल-गोल घुमने लगा तथा अपनी पूछ पकड़ने लगा |मुर्गी उपर से सब देख रही थी और सोच रही थी की ये क्या कर रहा है!उसे कुछ नही समझ आ रहा था|लोम्बी और तेज़ घूमकर अपनी पूँछ पकड़ने लगा यह देख मुर्गी का सर चकराने लगा और उसने अपना संतुलन खो दिया |और जाकर लोम्बी के बैग में गिर गयी !लोम्बी ने बैग उठाया और अपने कंधे पर रखकर तालाब की और चल दिया! और वह बहुत खुश था और सोच रहा था की मुर्गी कितनी स्वादिष्ट होगी |चूँकि वह मुर्गी को पकड़ने में काफी मेहनत करने के कारण थक गया था इसलिए ठीक से चल भी नही पा रहा था|

उसने सोचा की अभी रात होने में अभी समय है इसलिए कुछ देर मै आराम कर लेता हु !ये सोचकर उसने थैला एक बड़े पत्थर के पास रख दिया और पत्थर पर जाकर सो गया!मुर्गी ने अपना दिमाग लगाया और बाहर आ गयी और उसने लोम्बी को सोते देख आश्चर्य में पद गयी |वह बहुत हिमत वाली थी उसने जैसे- तैसे बड़े पत्थर को उस बैग में डालकर उसे बांध दिया तथा जल्दी जल्दी अपने घर की तरफ चल दी |लोम्बी उठा और तालाब की और चला गया !घर पहुच कर उसकी बीवी बोली लाल मुर्गी ले आये तो उसने कहा हा और उसने थैला अपनी बीवी को दे दिया |उसके बीवी ने बिना देखे ही थैले को मुह से खोलकर उस थैले को खोलते पानी में उल्टा कर दिया| तथा जैसे ही पत्थर पानी में गिरे वो खोलता पानी बाहर आकार दोनों पर गिरा और दोनों झुलस गये तथा दोनों की मोत हो गयी|उसके बाद मुर्गी ने कभी लोम्बी को नही देखा और खुशी-ख़ुशी अपना जीवन बिताने लगी |

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